रातोंरात दौलत

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अध्याय 05 धन अंतरण

कमरे में सन्नाटा था। सबके चेहरे के भाव बदल गए।

ऊपर से देखने पर यह बस टॉम और बाकी लोगों को सज़ा देने जैसा लग रहा था—लेकिन असल में यह रुतबा और दबदबा कायम करने की बात थी।

राइडर को स्कॉट ने खुद नियुक्त किया था और उसकी एक खास हैसियत थी।

आख़िर ये सारे एग्ज़ीक्यूटिव भी तो बड़े पदों पर बैठे कर्मचारी ही थे।

राइडर का कौन विरोध करता? सबने हामी में सिर हिला दिया।

राइडर चाहे तो उन्हें पल भर में नौकरी से निकाल सकता था।

राइडर संतुष्टि से सिर हिलाया। “तो फिर मैं तुम्हें ही निगरानी के लिए छोड़ रहा हूँ।”

यह कहकर वह सीधे पुरुषों के वॉशरूम से बाहर निकला और सोफिया से बोला, “वाइस प्रेसिडेंट, मुझे ऑफिस दिखाइए।”

“जी!” सोफिया फौरन उसके पीछे-पीछे चल पड़ी।

वॉशरूम में रह गए बाकी एग्ज़ीक्यूटिव आखिरकार राहत की साँस ले पाए। भीतर दबा गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पहले टॉम और उसके साथियों को जमकर गालियाँ दीं, फिर राइडर का आदेश पूरा करवाने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया।

“चाटना नहीं है? पलटकर मारोगे?!”

टॉम और बाकी लोग टूट चुके थे, लेकिन इन बड़े साहबों को नाराज़ करने की हिम्मत नहीं थी। बस दाँत भींचकर जो कहा गया, वही करते रहे।

सोफिया राइडर को 20वीं मंज़िल पर, सीईओ के ऑफिस में ले गई।

“मिस्टर क्लार्क, आपका ऑफिस कल ही साफ कराया गया था। लेआउट को लेकर कोई सुझाव?” सोफिया ने पूछा।

राइडर आलीशान लेदर सोफे पर बैठ गया और चारों ओर नज़र दौड़ाई—कमरा खुला-खुला और भव्य था।

“कोई सुझाव नहीं। वाइस प्रेसिडेंट, आप बैठिए। इतना औपचारिक होने की ज़रूरत नहीं।” राइडर ने कहा।

सोफिया उसके सामने बैठ गई, काली स्टॉकिंग्स में ढकी टाँगें शालीनता से क्रॉस कर लीं।

“मिस्टर क्लार्क, आज जो हुआ उसके लिए मुझे सच में बहुत अफसोस है। कृपया स्कॉट के सामने मेरे लिए एक अच्छा शब्द कह दीजिए।” उसने विनती की।

राइडर ने हाथ हिलाकर कहा, “मैं ये बात स्कॉट को नहीं बताऊँगा।”

“धन्यवाद, मिस्टर क्लार्क!” सोफिया ने सीने पर हाथ रखकर राहत की साँस ली, फिर भी वह अभी तक घबराई हुई थी।

राइडर ने बात बदल दी। “कंपनी के कई ऑपरेशन्स से मैं अभी वाकिफ नहीं हूँ। आगे मुझे मिस एंडरसन की मदद चाहिए होगी।”

“बिल्कुल! मिस्टर क्लार्क, कोई और निर्देश?”

“फिलहाल नहीं…” राइडर रुका। “लेकिन एक बात—मैंने सुना है टॉम, कंपनी के फाइनेंशियल मैनेजर का कज़िन है। क्या आपको पता था?”

“मैंने कभी नहीं सुना!” सोफिया ने गंभीर चेहरे के साथ सिर हिलाया। “कंपनी के नियम साफ कहते हैं कि फाइनेंस डिपार्टमेंट के अधिकारियों को कर्मचारियों के साथ पारिवारिक रिश्तों का खुलासा करना होता है। निश्चिंत रहें, मिस्टर क्लार्क, मैं इस मामले की पूरी जाँच कराऊँगी।”

राइडर ने घड़ी देखी। “आज के लिए इतना काफी है। मुझे कुछ काम हैं, तो मैं अभी निकल रहा हूँ।”

“मैं आपको बाहर तक छोड़ देती हूँ।”

“तकलीफ की ज़रूरत नहीं।”

सोफिया को अचानक कुछ याद आया। “मिस्टर क्लार्क, आज शाम छह बजे पार्टनर्स के साथ डिनर है। क्या आप आ पाएँगे?”

“हाँ। कहाँ है?”

“द पिंट हाउस!”

“ठीक है। मैं आ जाऊँगा।”

राइडर ने सिर हिलाया।

सोफिया के जाते ही उसने अपना फोन देखा।

उसी वक्त, उसके स्कूल के क्लास ग्रुप में एक मैसेज पॉप अप हुआ। भेजने वाला था टिम—क्लास प्रेसिडेंट।

सही बात है, टिम से निपटना तो वह अब तक कर ही नहीं पाया था।

“सब लोग, आज रात द पिंट हाउस में क्लास रीयूनियन रख रहा हूँ—मेरी तरफ से! जल्दी-जल्दी नाम लिखवा दो! और हाँ, हमारे क्लास टीचर मिस्टर ब्लेयर भी आएँगे!”

ग्रुप चैट तुरंत उछल पड़ी: “द पिंट हाउस तो ह्यूस्टन का सबसे बढ़िया रेस्टोरेंट है! बहुत महँगा!” “वाह, क्लास प्रेसिडेंट, तुम तो कमाल हो! मेरा नाम भी लिखो!” “मैं भी!”

टिम ने संतोष से मैसेज देखे। उसने अपने ऑफिस की एक फोटो खींचकर ग्रुप में डाल दी, कैप्शन लिखा: “काम ने जान निकाल दी है, दिन भर ऑफिस में फँसा रहता हूँ। सोचा सबको मिलाकर थोड़ा रिलैक्स कर लें। तुम सबकी याद आती है!”

वह साफ़-साफ़ शेख़ी बघार रहा था। जवाब तुरंत आने लगे: “वाह, ये डेस्क तो कमाल की है! कितनी जलन हो रही है!” “सुना है टिम किसी बड़ी कंपनी में एचआर मैनेजर है, साल के चार-पाँच लाख डॉलर कमा लेता है!”

क्लास टीचर, मिस्टर ब्लेयर, भी भावुक होकर बोले: “टिम, तू तो बड़ी ऊँचाइयों पर जाएगा! सबको इससे सीख लेनी चाहिए!”

टिम ने विनम्रता से जवाब दिया: “धन्यवाद, सर! आगे कभी किसी को मदद चाहिए हो तो बस बोल देना। क्लासमेट्स को एक-दूसरे का साथ देना चाहिए!”

ग्रुप चैट तारीफ़ों से भर गई।

तभी किसी ने ग्रुप में पूछा: “राइडर कुछ बोल क्यों नहीं रहा? क्या वो ग्रुप में है?”

“राइडर? वही जो हाई स्कूल में फ़ीस तक नहीं भर पाता था? जो दूसरों के फेंके हुए बचे-खुचे सेब उठा-उठाकर खाता था?”

“तब बचे हुए सेब खाता था, अब घर-जमाई बनकर मज़े कर रहा है!”

“रीढ़हीन निकम्मा!”

“सुना है उसकी बहन का कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हो गया और ये जगह-जगह पैसे उधार माँग रहा है। इसकी बातों में मत आना!”

“ऐसे घटिया इंसान को—मेरे पास पैसे हों भी, तो भी नहीं दूँ!”

राइडर को ज़रा भी फर्क नहीं पड़ा। स्कूल में उसकी किसी से खास बनती नहीं थी। फिर उसे उनकी राय की क्या परवाह?

ग्रुप में लगभग किसी को नहीं पता था कि वो व्हाट्सऐप नंबर उसी का है। बेहतर यही था कि इस उबाऊ ग्रुप से निकल जाए।

लेकिन तभी टिम ने मैसेज डाल दिया: “यक़ीन नहीं होता हमारी क्लास से ऐसा कचरा भी निकला। सोचकर ही शर्म आती है। तब भी चोरी करता था, जाने कैसी-कैसी गंदी हरकतें करता था। अब इसकी हालत खराब है, और ये इसका हक़दार है! सब लोग इससे सबक लो और इसके जैसा मत बनो!”

यह देखकर राइडर की पेशानी तन गई।

लोग उसके बारे में क्या कहते हैं, उसे फर्क नहीं पड़ता था—पर टिम अलग था। उसके साथ उसका हिसाब अभी बाकी था।

हाई स्कूल में, राइडर का घर गरीब था, इसलिए सब उसे नीची नज़र से देखते और दूर-दूर रहते। बस उसकी डेस्क पार्टनर, शार्लट, उससे ठीक से बात करती थी।

शार्लट खूबसूरत थी, स्कूल में उसके बहुत चाहने वाले थे—टिम भी उन्हीं में से एक था। मगर उसने सबको ठुकरा दिया, जैसे राइडर के लिए उसके मन में कुछ खास हो।

राइडर को भी वह पसंद थी, लेकिन गरीबी के कारण वह खुद को छोटा समझता और कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता। टिम की नज़र में राइडर उसका प्रेम-प्रतिद्वंद्वी था।

एक दिन पी.टी. की क्लास में, जब आसपास कोई नहीं था, टिम ने शार्लट के बटुए से पैसे चुराए और उन्हें राइडर की डेस्क में छिपा दिया।

क्लास के बाद शार्लट ने देखा कि पैसे गायब हैं। टिम की “जाँच-पड़ताल” में वे पैसे राइडर की डेस्क से “मिल” गए।

राइडर अपनी सफ़ाई नहीं दे पाया। उस पर चोरी का झूठा इल्ज़ाम लग गया! बात फैल गई। राइडर को कड़ी सज़ा मिली, और गरीब छात्रों वाली उसकी सहायता भी छीन ली गई।

इसी वजह से शार्लट धीरे-धीरे उससे दूर हो गई। टीचर्स को भी लगने लगा कि उसका चरित्र खराब है—वे उसे निशाना बनाने लगे, और आखिरकार उसे क्लास से निकाल दिया। उसके नंबर गिरते चले गए!

और भी बुरा तब हुआ जब गर्ल्स हॉस्टल से अंडरवियर गायब होने लगे और राइडर को ही मुख्य संदिग्ध बना दिया गया। उसे बेइज़्ज़त किया गया, और पूरी क्लास के सामने मंच पर खड़ा करके उससे माफ़ी मंगवाई गई!

लगातार अपमान—लेकिन पढ़ाई जारी रखने के लिए वह सब सहता रहा।

वो दाग़ लिए हुए—वह याद अब भी ताज़ा थी। आज भी उसे वही घुटन और कसक महसूस होती थी।

“ये सब तुमने खुद किया था। मुझे दोष मत देना।”

राइडर ने व्हाट्सऐप पर ग्रुप रेड-एन्बेलप सेट किया, रकम $20,000—जो भी “Tim is an idiot!” लिखेगा, वह क्लेम कर सकता था।

ग्रुप में साठ लोग थे। उसने लगातार बीस ट्रांसफर भेज दिए।

क्लासमेट्स ने ध्यान से देखा नहीं और यूँ ही रेड-एन्बेलप खोलते गए:

“Tim is an idiot!”

“Tim is an idiot!”

“Tim is an idiot!”

...

टिम ने रेड-एन्बेलप के लिए ऑटो-रिप्लाई ऑन कर रखा था।

“Tim is an idiot!”

उसके हाथ लगे सिर्फ़ $0.02!

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